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Top 40+ Mirza Ghalib Shayari on Love

Mirza Asadullah Baig Khan, also known by the pen names of Ghalib and Asad, is considered the last great and influential poet of the Mughal era. Here we are presenting you Mirza Ghalib Shayari in hindi on love.  In this post, we have 40+ Ghalib Famous Shayari for you to go mad about our content. We have collected some rare sad Shayari on love written by The greatest poet of all the time, one and only Ghalib Saab. During the Mughal time, his poetry was enormously popular in the city. He has written lots of Shayari on every mood for everyone. Once, he said “Jis shayar ki ghazal baalakhaane mein domni aur sadak par faqeer gaaye, use kaun maat kar sakta hai?” It shows how nice a person he was.

तो चलिये चले हैं आपको ग़ालिब के रोमांटिक और सैड लव शायरी की दुनिया मैं।

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❝ Ghalib Shayari on Love ❞

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है
हम को मालूम है, जन्नत की हक़ीक़त, लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को, ग़ालिब, ये ख़याल अच्छा है

आओ ले चलें इश्क को वहाँ तक,
जहाँ फिर से कोई कहानी बने
जहाँ फिर कोई गालिब नज्म़ पढे,
फिर कोई मीरा दिवानी बने !!

तुम न आए तो क्या सहर न हुई,
हाँ मगर चैन से बसर न हुई,
मेरा नाला सुना ज़माने ने मगर,
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।

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❝ Ghalib Shayari in Hindi on Love ❞

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ
मैं नहीं जानता दुआ क्या है

अगर होता है इत्तेफाक तो यूँ क्यों नहीं होता…
तुम रास्ता भूलो और मुझ् तक चले आओ

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❝ Mirza Ghalib Shayari in Hindi on Love ❞

नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक

तुम को पाना मेरी कोशिश नहीं
तुमको खुश देखना मेरी चाहत है!

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❝ Mirza Ghalib Shayari on Love ❞

‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइ’ज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे
फूँका है किस ने गोश-ए-मोहब्बत में ऐ ख़ुदा
अफ़्सून-ए-इंतिज़ार तमन्ना कहें जिसे

चांदनी रात के खामोश सितारों की क़सम,
दिल में अब तेरे सिवा कोई भी आबाद नहीं।

कोई रूह से लिपटा , तो कोई जिस्म से ,
मोहब्बत सबने की अपने अपने अंदाज़ से .!

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❝ Mirza Ghalib Love Shayari in Hindi ❞

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के
ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के!

मै नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब
यह न सोचा के एक दिन अपनी सांस भी बेवफा हो जाएगी

ना सुनो गर बुरा कहे कोई
ना कहो गर बुरा कहे कोई
रोक लो गर गलत चले कोई
बख्श दो गर खता करे कोई
जब तवक्कु ही उठ गई ग़ालिब
क्यों किसी का गिला करे कोई

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❝ Ghalib Sad Shayari on Love ❞

खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है,
मैं वह कतरा हूं समंदर मेरे घर आता है!!

बेवजह नहीं रोता, इश्क में कोई गालिब,
जिसे खुद से बढ़कर चाहो, वो रुलाता जरूर है!

बर्दाश्त नहीं तुम्हे किसी और के साथ देखना
बात शक की नहीं हक़ की है…!!!

सिर्फ प्यार करना काफी नहीं है
कुछ बनना भी पड़ता है, जिंदगी में इश्क़ पाने के लिए…!!!

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❝ Ghalib Love Shayari in Hindi ❞

उठती नहीं है आँख किसी और की तरफ,
पाबन्द कर गयी है किसी की नजर मुझे,
ईमान की तो ये है कि ईमान अब कहाँ,
काफ़िर बना गई तेरी काफ़िर-नज़र मुझे।

कुछ रिश्ते बचाने के लिए उसूल तोड़े हमने,
जहाँ गलती नहीं थी वहां भी हाथ जोड़े हमने…!!!

कभी फुर्सत हो तो इतना जरूर बताना,
वो कौन सी मोहब्बत थी, जो हम तुम्हे ना दे सके…!!!

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❝ Shayari Of Ghalib On Ishq ❞

बस एक आखिरी रस्म चल रही है हमारे दरमियाँ,
एक दूसरे को याद तो करते है पर बात नहीं करते…!!!

उसके गलत होने पर भी मैंने उसे चाहा था,
अपनी ही नज़रो में खुद को बार बार गिराया था…!!!

हम  तो  मुन्‍तजि़र  थे  तेरी  इनाय़त  के,
चलों  तुमने  कुछ  तो  किया, तबाह  ही  सही..

“धागा ही समझ, तू अपनी “मन्नत” का मुझे
तेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर हूँ मैं”

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❝ Mirza Ghalib Shayari ❞

“न आना मौत की अभी मेरा किरदार बाकि हे*
*लाया था जो अपने रब से वो उधार बाकि हे*
*दीद तो हो गई बहोत खुशियो की ग़ालिब*
*लेकिन अभी आक़ा के रोज़े का दीदार बाकि हे”

कभी-कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझको तेरी तलाश क्यों है
कि जब हैं सारे ही तार टूटे तो साज़ में इरतेआश क्यों है

मिसाल इसकी कहाँ है कोई ज़माने में
कि सारे खोने के ग़म पाए हमने पाने में
लतीफ़ था वो तख़य्युल से, ख्वाब से नाज़ुक
गँवा दिया उसे हमने ही आज़माने में

यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं,
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो!

Shayari Of Ghalib On Ishq

❝ Mirza Ghalib Famous Shayari in Hindi ❞

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं!
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं!

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गया..
दोनों को इक आदा में रज़ामंद कर गया !

That was our selected Ghalib’s beautiful hindi love and sad shayari  for you. Hope you have enjoyed our collection.

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