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30+ Best Rahat Indori Shayari in Hindi

Here we are Sharing the beautiful Rahat Indori Shayari in Hindi. You will get 30+ Best Sayari to share with your loved ones. A heart without love is like a body without a soul, emotional attachment with a feeling of strong attraction can be described through these amazing Hindi Shayari.

Rahat Saab was a very talented Urdu poet, you can read here Rahat Indori Sayari In Hindi. Read these heart-touching Shayari while thinking about your love, this will give you relaxation and you can feel each and every word. You can make these Shayari as your Whatsapp status and mention them whom you want to make feel special.

In this post, we have collected each and every best Shayari of Rahat Saab which is a gem for Hindi and Urdu Sayari lovers.

rahat indori shayari in hindi

❝ Rahat Indori Best Shayari ❞

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं
उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो
धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता हैं

सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे
कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ
परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे

सूरज सितारे चाँद मेरे साथ मेँ रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
शाख़ों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था
मैं बच भी जाता तो इक रोज़ मरने वाला था
मेरा नसीब मेरे हाथ काट गए वर्ना
मैं तेरी माँग में सिंदूर भरने वाला था

rahat indori shayri

❝ Rahat Indori Shayari in Hindi ❞

अपने होने का हम इस तरह पता देते थे
खाक मुट्ठी में उठाते थे, उड़ा देते थे

अब से पहले के जो क़ातिल थे बहुत अच्छे थे
कत्ल से पहले वो पानी तो पिला देते थे

हम भी अब झूठ की पेशानी को बोसा देंगे
तुम भी सच बोलने वालों के सज़ा देते थे

वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था
आना न आना मेरी मर्ज़ी है, तुमको तो बुलाना चाहिए था

मुझसे बात भी करनी थी, उसको गले से भी लगाना चाहिए था
उसने प्यार से बुलाया था, हमें मर के भी आना चाहिए था

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

नींद से मेरा त’अल्लुक़ ही नहीं बरसों से
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं

मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

rahat indori shayari hindi

❝ Rahat Indori Shayri ❞

उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर-मंतर सब
चाक़ू-वाक़ू, छुरियाँ-वुरियाँ, ख़ंजर-वंजर सब

जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे-रूठे हैं
चादर-वादर, तकिया-वकिया, बिस्तर-विस्तर सब

मुझसे बिछड़ कर वह भी कहाँ अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े-वपड़े, ज़ेवर-वेवर सब

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते !

मैं तो जलते हुए सहराओं का एक पत्थर था,
तुम तो दरिया थे मेरी प्यास बुझाते जाते !

बढ़ गयी है के घट गयी दुनिया
मेरे नक़्शे से कट गयी दुनिया ‘

एक नागन का ज़हर है मुझमे
मुझको डस कर पलट गयी दुनिया

जब भी दुनिया को छोड़ना चाहा
मुझसे आकर लिपट गयी दुनिया

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची

तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालुम
रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची

एक शब ऐसी भी गुजरी है खयालों में तेरे
आहटें जज़्ब किये रात सहर तक पहुँची

rahat indori sad shayari

❝ Rahat Indori Hindi Shayari ❞

राज़ जो कुछ हो इशारों में बता देना

हाथ जब उससे मिलाओ दबा भी देना

नशा वेसे तो बुरी शे है, मगर

“राहत”  से सुननी  हो तो थोड़ी सी पिला भी देना

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ

कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में
और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

rahat indori love shayari

❝ राहत इन्दौरी की शायरी ❞

दोस्ती जब किसी से की जाये|
दुश्मनों की भी राय ली जाये|

मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाये|

बोतलें खोल के तो पी बरसों,
आज दिल खोल के भी पी जाये|

परदेस जा रहे हो तो सब देखते चलो,
मुमकिन है वापस आओ तो ये घर नहीं मिले|

दोस्ती जब किसी से की जाये|
दुश्मनों की भी राय ली जाये|

मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाये|

बोतलें खोल के तो पी बरसों,
आज दिल खोल के भी पी जाये|

शहरों-शहरों गाँव का आँगन याद आया
झूठे दोस्त और सच्चा दुश्मन याद आया

पीली पीली फसलें देख के खेतों में
अपने घर का खाली बरतन याद आया

जंगल सर पे रख के सारा दिन भटके
रात हुई तो राज-सिंहासन याद आया

rahat indori hindi shayari

❝ Rahat Indori Best Shayari Bulati Hai ❞

बुलाती है मगर जाने का नईं
ये दुनिया है इधर जाने का नईं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नईं

सितारें नोच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नईं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नईं

अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे जिद्दी हैं परिंदे के उड़ा भी न सकूँ

फूँक डालूँगा किसी रोज ये दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है कि जला भी न सकूँ

हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|

न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

rahat indori best shayari

❝ राहत इंदौरी शायरी हिंदी 2 लाइन ❞

तुम हो मेरे सनम तू हो मेरे खुदा
तुम हो सब से अलग तुम हो सब से जुदा
सोचता हूँ तुम्हे दू मैं सौगात क्या
दिल तो देते हैं सब दिल की औकात क्या,
जान हाज़िर है मेरी अगर चाहिए

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

rahat indori attitude shayari

❝ राहत इंदौरी नफरत शायरी ❞

मेरे हुजरे में नहीं और कही पर रख दो
आसमां लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो
अब कहाँ ढूढने जाओगे हमारे कातिल
आप तो क़त्ल का इलज़ाम हमीं पर रख दो
उसने जिस ताख पे कुछ टूटे दिए रखे हैं
चाँद तारों को भी ले जाके वही पे रख दो

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए

दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चेहरों पे दोहरी नक़ाब रखते हैं

ये मय-कदा है वो मस्जिद है वो है बुत-ख़ाना
कहीं भी जाओ फ़रिश्ते हिसाब रखते हैं

हमारे शहर के मंज़र न देख पाएंगे
यहां के लोग तो आंखों में ख़्वाब रखते हैं

best shayari of rahat indori

❝ Rahat Indori Shayari in Hindi ❞

मेरा ज़मीर, मेरा ऐतबार बोलता है
मेरी जुबां से परवरदिगार बोलता है

तेरी जुबां कतरना बहुत ज़रूरी है
तुझे मर्ज है के तू बार-बार बोलता है?

कुछ और काम तो जैसे उसे आता ही नहीं
मगर वो झूठ बहुत शानदार बोलता है।

तेरे वादे की तेरे प्यार की मोहताज नहीं
ये कहानी किसी किरदार की मोहताज नहीं

लोग होठों पे सजाये हुए फिरते हैं मुझे
मेरी शोहरत किसी अखबार की मोहताज नहीं

इसे तूफ़ान ही किनारे से लगा सकता है
मेरी कश्ती किसी पतवार की मोहताज नहीं

मैंने मुल्कों की तरह लोगों के दिल जीते हैं
ये हुकूमत किसी तलवार की मोहताज नहीं

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते !

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते !

best of rahat indori shayari

❝ Best of Rahat Indori Shayri ❞

बुलंदियों का नशा टूट कर बिखरने लगा
मेरा जहाज़ ज़मीन पर उतरने वाला था

मेरे चिराग मेरी शब मेरी मुंडेरें हैं
मैं कब शरीर हवाओं से डरने वाला था

अँधेरे चारों तरफ सायें-सायें करने लगे,
चिराग हाथ उठाकर दुआएं करने लगे
सब सलीक़ा हमने सिखाया था जिनको चलने का,
वो लोग आज हमें दाएं बाएं करने लगे
तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर,
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे
अजीब रंग था मजलिस का,
ख़ूब महफ़िल थी सफ़ेदपोश उठे कायं-कायं करने लगे।

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